आशा खत्री ‘लता’ के दोहे चुभते थे पहले महज, पग में पथ के शूल। मिलते टुकड़े काँच के, आज ओढक़र धूल।। भरे पेट भी फिर रहा, जैसे भूखा गिद्ध।...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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