कैलाश झा ‘किंकर’ के दोहे आँखों से मोती झड़े, देख-देख बाजार। खेल-खिलौने पर पड़ी, महँगाई की मार।। आँखों में सपने बहुत, हों कैसे साकार। ...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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