चन्द्रसेन विराट के दोहे भीमसेन जोशी गज़ब, खरज भरी आवाज। जब भी गायें डूबकर, डूबे रसिक समाज।। कभी किशोरी जी कहीं, बुने स्वरों के ख्वाब।...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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