छाया शुक्ला के दोहे जिसने ली बस बद्दुआ और उठाई आह। पतझड़ जैसे वो झरा, होता गया तबाह।। 2 रिश्तों के हर छंद का, बहुत कठिन भावार्थ। केश...
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शनिवार, 14 जनवरी 2023
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