डॉ. कृष्णकुमार 'नाज़' के दोहे उगता सूरज देखकर, कुहरा हुआ उदास। खिली धूप ने छीन ली, जीवन की हर आस।। जीवन टापू की तरह, है बेबस कमज़ो...
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शनिवार, 14 जनवरी 2023
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