ताराचन्द ‘नादान’ के दोहे कमरे में छोड़ा नही, कोई रोशनदान। देख तभी मुरझा गया, भावों का गुलदान।। पलट गयी सब रीत हैं, बदल गया है दौर। च...
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शनिवार, 14 जनवरी 2023
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