नित्यानंद ‘तुषार’ के दोहे कैसा उल्टा वक़्त है, कैसा उल्टा दौर। जो चोरी में लिप्त है, बनता है सिरमौर।। तुकबंदी आती नहीं, कविता से है द...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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