नज़्म सुभाष के दोहे हुए सघन जब घन धरा, मचल उठी जलधार। रुग्ण नदी फिर जी उठी, करने को विस्तार।। मनगढ़न्त इतिहास से, फैलाकर भ्रमजाल। संघर्ष...
नज़्म सुभाष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नज़्म सुभाष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 14 जनवरी 2023
!—end>!—start>