बाबू बालमुकुन्द गुप्त के दोहे सेल गई बरछी गई, गये तीर तरवार| घड़ी छड़ी चसमा रहे, छत्रिन के हथियार|| विश्वामित्र वसिष्ठ के, वंशज हा! श्रीराम...
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शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025
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