रमेश प्रसून के दोहे पर्वत है तो खाइयाँ, रहतीं उसके साथ। उच्चस्थों का नीचपन, नहीं छोड़ता हाथ।। सूरज में ठंडक लगे, चन्दा में यदि ताप। गय...
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रविवार, 15 जनवरी 2023
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