रामशंकर वर्मा के दोहे सागर से भर ले चले, मेघ वारि जंगाल। उलट दिए नभ श्रृंग से, वसुधा हुई निहाल।। हरियल-हरियल प्रकृति है, सरस हुए तृन...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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