रामहर्ष यादव 'हर्ष' के दोहे दुरभि-संधियाँ हो गयीं, दुष्टजनों के बीच। सिर्फ़ दिखावे के लिए, कीचड़ रहे उलीच।। झोपड़ियों के मौन से...
रामहर्ष यादव 'हर्ष' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रामहर्ष यादव 'हर्ष' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 15 जनवरी 2023
!—end>!—start>