रामानुज त्रिपाठी के दोहे अंधकार ने ली हड़प, जब से सारी खाट। बिछा रही है रोशनी, फटा-पुराना टाट।। अपहृत करके रोशनी, कर चिराग़ को क़ैद। अं...
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रविवार, 15 जनवरी 2023
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