शंकर शरण लाल बत्ता के दोहे मारो मत माँ गर्भ में, बेटी करे पुकार। अपनी ही क्यों कोख पर, करती अत्याचार।। नहीं बनूँगी माँ कभी, मैं अपनों...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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