संध्या श्रीवास्तव के दोहे चक्की-सी है जिंदगी, दुख-सुख दोनों पाट। जैसा भी आये समय, हँस कर उसको काट।। जो संवेदनहीन हैं, वे ही करते राज।...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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