सतीश गुप्ता के दोहे वादों का मुँह फेरना, रिश्तों के अनुबंध। बिखर गए हैं रेत से, अर्थहीन सम्बंध।। यश अपयश दोनों हुए, कुसमय एक समान। र...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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