सत्यवान वर्मा ‘सौरभ’ के दोहे मन रहता व्याकुल सदा, पाने माँ का प्यार। लिखी मात की पातियाँ, बाँचू बार हजार।। बना दिखावा प्यार अब, लेती ...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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