सत्यशील राम त्रिपाठी के दोहे पता पूछते रह गये, पगडंडी से रोड। मंज़िल वाली डाक का, बदल गया पिन कोड।। रक्खा हो तेज़ाब ज्यों, खाद्यान्नों क...
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रविवार, 15 जनवरी 2023
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