दोहा कोश : स्नेहलता ‘नीर’

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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

स्नेहलता ‘नीर’ के दोहे 

स्नेहलता ‘नीर’ के दोहे  आसमान से गिर रहे, रत्न असंख्य अनूप। भोर तृणों की नोक पर, चमके पाकर धूप।। यहीं बनी हैं जातियाँ, यहीं बने सब धर्...
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