हरिलाल मिलन के दोहे तोड़ रही मजबूूरियाँ, उस समर्थ के व्यूह। जिसके तन में आ बसी, किसी बधिक की रूह।। सुबह-शाम पीता रहा, सूरज जिसका रक्...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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