महेन्द्र कुमार वर्मा के दोहे  - दोहा कोश

दोहा कोश

दोहा छंद का विशाल कोश

शनिवार, 14 जनवरी 2023

महेन्द्र कुमार वर्मा के दोहे 

महेन्द्र कुमार वर्मा के दोहे 

कहती है ये जि़न्दगी, कर थोड़ा उपकार।
देने से घटते नही, विद्या और विचार।।

कलम कभी तलवार है, कलम कभी है ढाल।
कलम सामने मौन हैं, सारे गूढ़ सवाल।।

जीवन में कुछ सुख मिले, और मिले संताप।
जैसे ही इक सुख मिला, जागा मन में पाप।।

धोखेबाजों पर कभी, करना मत विश्वास।
इनकी मीठी बात में, होता विष का वास।।

इक दीपक लड़ता रहा, तम से सारी रात।
जो कोशिश करते नहीं, पाते हरदम मात।।

मनुज बहुत कमजोर है, मनुज बहुत लाचार।
मनुज मनुज पर ही करे, हरदम अत्याचार।।

जीवनपथ पर मिल रहा, हिचकोलों का प्यार।
गर सपाट हो जिन्दगी, जीने का क्या सार।।

सच कहना आसान है, पर वह सच मत बोल।
जो कटुता से हो भरा, लगे जहर का घोल।।

सीखो भाषा प्यार की, होती है आसान।
इसमें नैना बोलते, रहती मूक जुबान।।

आसानी से कुछ नहीं, मिलता मेरे मीत,
या तो उसको भूल जा, या लो उसको जीत।।


 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें