अनिरुद्ध प्रसाद विमल के दोहे लिख-लिख कर हम मर गये, मनपांखी बेचैन। समय कहो, हम क्या करें, कब आयेगा चैन।। बहुत विवश हो कर रहा, समय आज आह्वा...
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बुधवार, 25 अक्टूबर 2023
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