एम.पी.विमल के दोहे मानव तन पाया मगर, मानवता है दूर। दानवता के खेल में, मानव चकनाचूर।। अत्र तत्र सर्वत्र क्यों, होता है अब खून। प्रजा...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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