कबीरदास के दोहे फूटी आँख विवेक की, लखे ना सन्त असन्त। जाके संग दस-बीस हैं, ताको नाम महन्त॥ साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय। ...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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