कमलेश व्यास ‘कमल’ के दोहे अमराई कुछ नीम थे, थी पीपल की छाँव। धीरे-धीरे गुम हुआ, महानगर में गाँव।। आभामंडल क्षीण है, नहीं बात में तंत। ...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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