डॉ० जगदीश व्योम के दोहे हंस ताल से उड़ गया, कांँप गया शैवाल| लहरों की धड़कन बढ़ी, व्यग्र हो गया ताल|| हारिल बैठा खेत में, लकड़ी दाबे पांँव|...
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रविवार, 15 जनवरी 2023
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