डॉ. रघुनाथ मिश्र ‘सहज’ के दोहे अर्थ नहीं उस ज्ञान का, जो न सँवारे देश। ज्यों तन मैला है अगर, वहाँ निरर्थक वेश।। पद लोलुप तू बन गया, ल...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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