डॉ. शील कौशिक के दोहे ऊँचे भवनों से घिरा, अदना एक मकान। धूप छीनते और की, खुद को कहें महान।। मैया के हर झूठ पर, आता मुझको प्यार। भूखी...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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