डॉ. सुरेश अवस्थी के दोहे सन्ध्या रोयी रात भर, लेकर चाँद-रुमाल। सूरज से करती रही, सीधे तल्ख़ सवाल।। कुहरे ने ऐसे किये, शीतल कठिन कसाव। पे...
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रविवार, 15 जनवरी 2023
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