दिनेश रस्तोगी के दोहे माला, कंठी, गेरुये, वस्त्र पहनकर बाज। जन-चिंता में घूमते, बस कुर्सी के काज।। जब चुनाव का दौर हो, क्या शकुनी क्या...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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