पार्थ तिवारी के दोहे आँचल में कुहरा भरे, नयनों धरे अलाव। शाम शीत की दे रही, बन्धन का प्रस्ताव।। चूल्हे की साँसें थमी, हुई रसोई मौन। इस मह...
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शनिवार, 14 जनवरी 2023
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