मिथिलेश वामनकर के दोहे केवल देखे आपने, मेरे शब्द अधीर। मैंने भोगी है मगर, अक्षर-अक्षर पीर।। टूटेगा उस दिन प्रिये, रिश्तों का उपवा...
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शनिवार, 14 जनवरी 2023
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