रवि खण्डेलवाल के दोहे 'सत्य' कुटी में आज भी, रहता गोबर लीप। छल से बन बैठा कुटिल, 'झूठ', महल का दीप।। संयम ने 'रवि...
रवि खण्डेलवाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रवि खण्डेलवाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 15 जनवरी 2023
!—end>!—start>