रामनरेश 'रमन' के दोहे अपने पैरों आदमी, रहा कुल्हाड़ी मार। अंधा होकर कर रहा, पेड़ों का व्यापार।। कुछ तो ऊँचे उड़ गए, कुछ बेबस ...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023
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