रिश्तों में ऐसी खिंची , गहरी एक लकीर। बेटे को दिखती नहीं , बूढ़ी माँ की पीर।। आया था बहुरूपिया , दिया न हमने ध्यान। चला गया है बाँटकर , अ...
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रविवार, 28 जनवरी 2024
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