वृन्द कवि के दोहे रागी अवगुन न गिनै , यहै जगत की चाल। देखो , सबही श्याम को , कहत ग्वालन ग्वाल॥ अपनी पहुँच विचारिकै , करतब करिये दौर...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2023
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