डॉ. मधु प्रधान के दोहे दो रंगी हैं नीतियाँ, दो रंगे हैं भाव। होठों पर मीठे वचन, मन में भरा दुराव।। मिली चाँद को चाँदनी, मोती को मृदु आब। कौन...
मंगलवार, 14 नवंबर 2023
बुधवार, 25 अक्टूबर 2023
अनिरुद्ध प्रसाद विमल के दोहे
अनिरुद्ध प्रसाद विमल के दोहे लिख-लिख कर हम मर गये, मनपांखी बेचैन। समय कहो, हम क्या करें, कब आयेगा चैन।। बहुत विवश हो कर रहा, समय आज आह्वा...
रविवार, 15 अक्टूबर 2023
महेंद्र सिंह चौहान के दोहे
महेन्द्रसिंह चौहान के दोहे बाँध बनाकर आपने, नाम कमाया खूब। नदिया लेकिन मर गयी, खुद के जल में डूब।। उछल कूद से कब बढ़ा, आगे वहाँ रिवाज। जंगल ज...
शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023
डॉ उर्मिलेश के दोहे
डॉ उर्मिलेश के दोहे इतने थाने देखकर, अक्ल हुई हैरान| इस बस्ती में किस तरह, जिंदा हैं इंसान|| पल में लगा 'ज़लील' वह, पल में लगा '...
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