जात-पात के नाम पर, करते दो-दो हाथ। नजर वही आते 'शकुन', मदिरालय में साथ।। सुरा-सुंदरी में रहा, डूबा सारी रात। वही उजालों में करे, मर्...
शुक्रवार, 30 मई 2025
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025
बालमुकुन्द गुप्त के दोहे
बाबू बालमुकुन्द गुप्त के दोहे सेल गई बरछी गई, गये तीर तरवार| घड़ी छड़ी चसमा रहे, छत्रिन के हथियार|| विश्वामित्र वसिष्ठ के, वंशज हा! श्रीराम...
शनिवार, 3 फ़रवरी 2024
सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा' के दोहे
सुरेशचन्द्र 'सर्वहारा' के दोहे बेटे थे परदेश में, करता कौन तलाश। रही तीन दिन बाप की, घर में सड़ती लाश।। पुरुष श्रेष्ठता का भरा, ...
रविवार, 28 जनवरी 2024
रूपेश धनगर के दोहे
रिश्तों में ऐसी खिंची , गहरी एक लकीर। बेटे को दिखती नहीं , बूढ़ी माँ की पीर।। आया था बहुरूपिया , दिया न हमने ध्यान। चला गया है बाँटकर , अ...
मंगलवार, 14 नवंबर 2023
डॉ. मधु प्रधान के दोहे
डॉ. मधु प्रधान के दोहे दो रंगी हैं नीतियाँ, दो रंगे हैं भाव। होठों पर मीठे वचन, मन में भरा दुराव।। मिली चाँद को चाँदनी, मोती को मृदु आब। कौन...
बुधवार, 25 अक्टूबर 2023
अनिरुद्ध प्रसाद विमल के दोहे
अनिरुद्ध प्रसाद विमल के दोहे लिख-लिख कर हम मर गये, मनपांखी बेचैन। समय कहो, हम क्या करें, कब आयेगा चैन।। बहुत विवश हो कर रहा, समय आज आह्वा...
रविवार, 15 अक्टूबर 2023
महेंद्र सिंह चौहान के दोहे
महेन्द्रसिंह चौहान के दोहे बाँध बनाकर आपने, नाम कमाया खूब। नदिया लेकिन मर गयी, खुद के जल में डूब।। उछल कूद से कब बढ़ा, आगे वहाँ रिवाज। जंगल ज...
शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023
डॉ उर्मिलेश के दोहे
डॉ उर्मिलेश के दोहे इतने थाने देखकर, अक्ल हुई हैरान| इस बस्ती में किस तरह, जिंदा हैं इंसान|| पल में लगा 'ज़लील' वह, पल में लगा '...
ज़हीर कुरेसी के दोहे
ज़हीर कुरेसी के दोहे जो सत्ता को पा गया, उसके ही घर-द्वार| प्रजातंत्र में भी लगा, राजा का दरबार|| सबको लड़ने ही पड़े, अपने-अपने युद्ध| चाहे ...
रविवार, 15 जनवरी 2023
दोहा संकलन और संपादक
दोहा संकलन और संपादक सुनो समय को : सं- जय चक्रवर्ती आधुनिक लोकप्रिय दोहाकार : सं- अशोक 'अंजुम' आधी आबादी के दोहे : सं- रघुविंद्र या...
दोहा संग्रह और दोहाकार
दोहा संग्रह और दोहाकार घरौंदे रेत के : यतीन्द्र नाथ राही कुछ दोहे नीरज के : पदमभूषण नीरज प्रिया तुम्हारा गाँव और चम्बल में सत्संग : अशोक ...
दीपक अवस्थी 'अक्षत' के दोहे
दीपक अवस्थी 'अक्षत' के दोहे बासमती गोदाम में, खुद की थाली भात| नोटों के बंडल कहाँ ? सिक्के आये हाथ।। सौ की सीधी-सी रही, सदा एक ही ब...
प्रदीप दुबे 'दीप' के दोहे
प्रदीप दुबे 'दीप' के दोहे होरी बैठा खेत में, डंठल रहा सकेल। बूटे-बूटे खा गए, राजाजी के बैल।। कहां प्रीत की माधुरी, कहां नेह की गंध। ...
डॉ. हरि प्रकाश श्रीवास्तव (अवधी हरि) के दोहे
डॉ. हरि प्रकाश श्रीवास्तव (अवधी हरि) के दोहे माँस नोचने में अधिक, हमसे मानव सिद्ध। यही सोचकर हो गये, शायद ग़ायब गिद्ध।। हर दिन छोटी हो रह...
डॉ. सुरेश अवस्थी के दोहे
डॉ. सुरेश अवस्थी के दोहे सन्ध्या रोयी रात भर, लेकर चाँद-रुमाल। सूरज से करती रही, सीधे तल्ख़ सवाल।। कुहरे ने ऐसे किये, शीतल कठिन कसाव। पे...
सत्यशील राम त्रिपाठी के दोहे
सत्यशील राम त्रिपाठी के दोहे पता पूछते रह गये, पगडंडी से रोड। मंज़िल वाली डाक का, बदल गया पिन कोड।। रक्खा हो तेज़ाब ज्यों, खाद्यान्नों क...
सतीश चंद्र शर्मा 'सुधांशु' के दोहे
सतीश चंद्र शर्मा 'सुधांशु' के दोहे अंधों की नगरी यहाँ, काने हैं सरदार। फिर-फिर बाँटें रेवड़ी, अपनों को हर बार।। पिंजड़े के तोता बने...
शैलेन्द्र शर्मा के दोहे
शैलेन्द्र शर्मा के दोहे काली रातों का जिन्हें, भाता है विस्तार। आज उजाले के वही, जुगनू ठेकेदार।। जिनके कारण नट बने, करतब किये हजार। निग...
शुभम् श्रीवास्तव ओम के दोहे
शुभम् श्रीवास्तव ओम के दोहे बोधि वृक्ष ले हाथ में, घूम रहे दरवेश। अंजुलि भर माटी मिले, बच जाये परिवेश।। सूरज को बहला रही, बची-खुची मुस्का...
रामानुज त्रिपाठी के दोहे
रामानुज त्रिपाठी के दोहे अंधकार ने ली हड़प, जब से सारी खाट। बिछा रही है रोशनी, फटा-पुराना टाट।। अपहृत करके रोशनी, कर चिराग़ को क़ैद। अं...
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